जियो तो प्राण ढाल दो ज़िन्दगी में !!!
Thursday, November 22, 2018
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मुक्तक : रागिनी की हुंकार तोड़ विषमता की कारा को, समता का रण-शंख बजाओ। विपदा के पर्वत हिल जाएँ, ममता का बल-वज्र चलाओ। रूढ़ि-शिला पर चोट करो अ...
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ख़ुमार ही ख़ुमार है ज़मीं से आसमान तक। बिछी हुई बहार है ज़मीं से आसमान तक।। कली कली महक उठी जो शबनमी फुहार से, निखार ही निखार है ज़मी से आसमा...
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नवगीत ------- -------- बुलन्दी हौंसलों में है , छुयेगी जो सदा मंज़िल ---------------- ----------------- 1222 1222 1222 1222 लिखा इ...
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