Monday, August 30, 2021

दोहे



ब्रज की रज है पावनी,बसते  राधा श्याम ।
कण-कण पुलकित प्रेम में,पवन पुकारे श्याम

 मनभावन मन मोहना,मनहर मोहक रूप ।
नन्दगाँव का लाड़ला,अद्भुत रूप स्वरूप ।।

राधा ऐसी बावरी, छलिया माखन चोर ।
बाँसुरिया बैरिन भई, बनी हुई सिरमौर ।।

मीरा का वो कृष्ण है,राधा का है श्याम ।
दरसन की दीवानगी,जोगन रटती नाम ।।

अधरन पौंड़ी आप है,गरदन टेढ़ी होय ।
बाँसुरिया सौतन बनी,लाज शरम है खोय ।।

नील वसन फरिया कमर,पहन राधिका आय ।
यमुना तट कान्हा खड़े, मंद -मंद मुसकाय । ।

 मीठी- मीठी बंसरी,मोहक नन्द किशोर।
सुध बुध राधा खो गयी,मनवा हुआ विभोर ।।

तरु पर छिपकर बैठता,मोहन यमुना तीर ।
मगन गोपियाँ जब भयीं, चुरा गया तब चीर ।।

रागिनी स्वर्णकार(शर्मा)इन्दौर


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