Saturday, May 16, 2026

 मुक्तक : रागिनी की हुंकार


तोड़ विषमता की कारा को, समता का रण-शंख बजाओ।

विपदा के पर्वत हिल जाएँ, ममता का बल-वज्र चलाओ।

रूढ़ि-शिला पर चोट करो अब, नव-युग का निर्माण करो,

शोषित का स्वर बनकर गरजो, मुक्त-गगन में दीप जलाओ॥


Dr ragini swarnkar

डॉ रागिनी स्वर्णकार

No comments:

Post a Comment

 मुक्तक : रागिनी की हुंकार तोड़ विषमता की कारा को, समता का रण-शंख बजाओ। विपदा के पर्वत हिल जाएँ, ममता का बल-वज्र चलाओ। रूढ़ि-शिला पर चोट करो अ...